बीजापुर , मार्च 12 -- छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला करने वाले युवाओं के लिए एक सकारात्मक पहल के तहत, जिला प्रशासन ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 56 पूर्व नक्सलियों को 16 लाख 80 हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की है। यह कदम इन लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देशन में यह वित्तीय सहायता राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ नक्सलवाद पुनर्वास नीति के तहत प्रदान की गई है। जिला पीआरओ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उनके कौशल विकास और प्रशिक्षण की अवधि के दौरान आर्थिक सहायता दी जाती है। इसी क्रम में इन 56 प्रशिक्षणार्थियों को 10-10 हज़ार रुपये प्रति माह की दर से लाभान्वित किया गया है।
प्रशासन द्वारा अपनाई गई वित्तीय रणनीति विशेष रूप से उल्लेखनीय है। प्रशिक्षणार्थियों को तत्काल जरूरतों के लिए एक माह की नकद राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है, जबकि शेष दो माह की राशि (कुल 11,20,000 रुपये) को एक वर्ष की सावधि जमा (एफडी) के रूप में उनके नाम कर दिया गया है। इस दोहरी व्यवस्था का उद्देश्य न केवल तात्कालिक खर्चों के लिए सहायता उपलब्ध कराना है, बल्कि इन युवाओं में बचत की आदत को विकसित करना और उनके दीर्घकालिक आर्थिक पुनर्वास को सुनिश्चित करना भी है।
यह पहल बीजापुर जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता और व्यावहारिकता के समन्वय से चलाए जा रहे पुनर्वास अभियान का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि केवल आत्मसमर्पण कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ इन प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं, ताकि वे कौशल विकसित कर सकें और अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इस समग्र दृष्टिकोण से न केवल ये पूर्व नक्सली हिंसा के मार्ग से दूर हो रहे हैं, बल्कि विकास की मुख्य धारा से जुड़कर समाज में एक सम्मानित नागरिक के रूप में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। प्रशासन की यह पहल क्षेत्र में शांति और स्थायित्व स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
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