देहरादून , अक्तूबर 25 -- उत्तराखंड के देहरादून जनपद अन्तर्गत ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में वर्ष 2026 बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग प्रथम वर्ष के नए बैच के लिए रविवार को लैम्प लाइटिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नर्सिंग प्रोफेशनल में नॉलेज, स्किल्स और एटीट्यूड का समावेश होना जरूरी है।

संस्थान के मुख्य सभागार में आयोजित द्वीप प्रज्जवलन और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समारोह की मुख्य अतिथि मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की एडिशनल डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल रेचल थॉमस ने कहा कि नर्सिंग का क्षेत्र चुनौतियों भरा पेशा है और इसमें मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार के स्वास्थ्य को मजबूत रखना होता है। उन्होंने कहा कि इस पेशे में संयम, देखभाल, भावना और लगाव के साथ की जाने वाली सेवा शामिल है। उन्होंने साइंटिफिक ज्ञान, क्लिनिकल अनुभव और दया युक्त सेवाभाव के नर्सिंग प्रोफेशनल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लैम्प लाइटिंग सेरेमनी, सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि प्रोफेशनल ज्ञान, मूल्यों और नर्सिंग की भावना को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी है। उन्होंने इस पेशे में अनुशासन, जवाबदेही और नैतिक व्यवहार को बनाए रखते हुए रिसर्च, एजुकेशन लीडरशिप और पॉलिसी बनाने के अवसरों को तलाशने की बात भी कही।

विशिष्ट अतिथि डीन एकेडेमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने इस पेशे में नॉलेज, स्किल्स और एटीट्यूड को बेहतर बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा करने का एक माध्यम भी है। साथ ही कहा कि इसमें ईमानदारी, पेशेंट कॉंफिडेंसिटिलिटी, एथिकल प्रेक्टिस और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की भी इसमें जरूरत होती है।

काॅलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिन्सिपल प्रो. (डॉ.) स्मृति अरोड़ा ने नए बैच को शुभकामनाएं देते हुए नर्सिंग कॉलेज की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने काबिल, दयालु और नैतिक रूप से जिम्मेदार नर्सिंग प्रोफेशनल बनाने में नर्सिंग एजुकेशन के महत्व पर जोर दिया।

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