बीकानेर , मई 26 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सीमाओं पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को आधुनिकतम तकनीक एवं बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रति आश्वस्त करते हुए कहा है कि सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा के लिए बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और प्रशासन मिलकर मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड बनायें।
श्री शाह मंगलवार को बीकानेर जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ की सांचू पोस्ट पर प्रहरी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे सीमा प्रहरी तेज बारिश, अधिक तापमान, घने जंगल, बर्फीली चोटियों जैसी कठोर परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करते हैं। वे कर्तव्यपरायणता, वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान की भावना के साथ देश की सीमा पर मुस्तैदी से तैनात रहते हैं।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी बीएसएफ के जवानों ने सीमावर्ती जिलों के नागरिकों का हौसला बनाये रखा और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में अहम भूमिका निभायी। उन्होंने कहा कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा के परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन किया है। सेना और बीएसएफ का आधुनिकीकरण किया गया है वहीं, सुरक्षा की दृष्टि से अत्याधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराये गये हैं तथा आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब देने की नीति अपनाई गयी है।
श्री शाह ने बीएसएफ के दो हजार से अधिक शहीद सीमा प्रहरियों को नमन करते हुए कहा कि इन्होंने भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है और देश को इन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण में सीमा प्रहरियों का बड़ा योगदान है। वर्ष 2019 में सीमाओं पर पौधारोपण की विशेष मुहिम चलाई गयी। अब तक सात करोड़ 35 लाख पौधे जवानों द्वारा लगाये गये हैं। आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने में यह उपयोगी साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में आज बेटियां बेटों से दो कदम आगे है। केंद्र सरकार वर्ष 2030 तक इन बेटियों के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजस्थान में बीएसएफ की सीमा चौकियों पर बेटियों के लिए 40 करोड़ रुपये की लागत से 79 बैरक स्वीकृत किये गये हैं, जिनमें से आज लोकार्पण हुए 14 बैरक सहित 67 का काम पूरा हो चुका है। शेष 12 बैरक का कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा। देश की सीमा चौकियों पर 200 करोड़ की लागत से 360 बैरक बनाये जा रहे हैं।
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