मुंबई , जनवरी 15 -- बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव में विपक्षी नेताओं और मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि इस बार के चुनाव में उंगलियों पर लगायी जाने वाली 'मार्कर स्याही 'आसानी से मिट रही है।

इसके मद्देनजर आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रुबेन मास्करेन्हास ने गुरुवार को मुंबई में मतदान शुरू होने के कुछ घंटों बाद महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

श्री मास्करेन्हास ने एक्स पर वीडियो के साथ ट्वीट किया, "जैसा मैं इस वीडियो में दिखा रहा हूं, सरकार निर्मित 'अमिट स्याही' के बजाय मार्कर के उपयोग से मतदाताओं की उंगलियों पर निशान बनाये जा रहे हैं, जिन्हें 'नेल पॉलिश रिमूवर' से आसानी से मिटाया जा सकता है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। चुनावों को मजाक में बदला जा रहा है,"एक और घटनाक्रम में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिव सेना युवा शाखा (युवा सेना) के पदाधिकारी साइनाथ दुर्गे ने भी आरोप लगाया कि इस बार मार्कर स्याही का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मतदाताओं की उंगली पर स्याही के निशान आसानी से मिट रहे हैं।

श्री दुर्गे ने कहा, "मतदाताओं की उंगलियों पर लगायी जाने वाली स्याही इतनी आसानी से नहीं मिटती। यह कई दिनों तक रहती है, लेकिन इस बार साधारण मार्कर का उपयोग किया जा रहा है, जिस कारण स्याही के निशान थिनर के उपयोग से भी मिट जा रहे हैं। यह फर्जी और कईं बार मतदान करने वालों को रोकने के लिए नाकाफी है।"गुरुवार को दादर के बालमोहन विद्यालय मतदान बूथ पर मतदान के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के संस्थापक और प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जतायी, "पूरी प्रशासनिक मशीनरी सत्तारुढ़ पार्टी को जिताने के लिए काम कर रही है। मतदान प्रक्रिया में मतदाताओं की उंगलियों पर पहले जो स्याही लगायी जाती थी, उसकी जगह अब मतदाताओं की उंगलियों पर मार्कर से स्याही लगायी जा रही है। हैंड सैनेटाइजर के उपयोग से यह स्याही मिट रही है। हम इसे रोकने के लिए काम कर रहे हैं। इस तरीके से सत्ता में आना जीत नहीं कहलाता।"राज ठाकरे ने कहा, "सत्तारुढ़ पार्टी ने किसी भी तरीके से चुनाव जीतने का निर्णय लिया है। जब हमने दो बार मतदान करने वाले मतदाताओं का मुद्दा उठाया तो चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमने वीवीपैट मशीनों का मुद्दा भी उठाया, लेकिन इस बार यहां कोई वीवीपैट मशीन नहीं हैं। इसलिए हमें नहीं पता कि हमने जिसे वोट दिया है, वह हमारे उम्मीदवार को गया या नहीं।"इसी बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त भूषण गगरानी ने भी माना कि उंगलियों पर मार्कर से निशान लगाने के बाद नाखून पर लगी स्याही मिट जाती है।

श्री गगरानी ने मतदाताओं के आरोपों के जवाब में कहा, "हम सभी शिकायतों की जांच करेंगे। प्रारंभिक निरीक्षण यह है कि नाखून पर लगायी गयी स्याही मिट जाती है, लेकिन त्वचा पर लगी स्याही नहीं मिटती।"कोल्हापुर जिले के कर्मवीर इंग्लिश मीडियम स्कूल के एक मतदान केंद्र से भी मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही के निशान आसानी से मिटने की समान घटना रिपोर्ट की गयी है। पुणे में कई मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि मतदान के बाद उनकी उंगलियों पर लगायी गयी स्याही लगभग तुरंत ही मिट गयी। धायरी क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मतदान के बाद अपनी उंगली से स्याही हटाने की कोशिश करने वाले एक व्यक्ति की पिटाई की।

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