मुंबई , अक्टूबर 23 -- महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी ) ने सर्दियों के मौसम से पहले निर्माण कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ वाली साइटों के लिए 28-सूत्रीय नियम लागू किये हैं और अचानक निरीक्षण के लिए वार्ड स्तर पर 76 टीमें तैनात की गयी है।

नगर प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो डेवलपर्स, ठेकेदार और साइट ऑपरेटर प्रदूषण नियंत्रण के तय नियमों का उल्लंघन करते पाये जायेंगे, उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जा सकता है। इसके अलावा, उनके निर्माण कार्यों को रोकने का आदेश दिया जा सकता है या उनकी साइट को सील भी किया जा सकता है।

इस सख्त अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों से शहर के वायु प्रदूषण में बहुत अधिक वृद्धि न हो। खासकर सर्दियों के महीनों में, जब मौसम की स्थिति के कारण प्रदूषक तत्व हवा में अधिक जमा हो सकते हैं।

इस नयी व्यवस्था के तहत, निरीक्षण टीमें शहर के विभिन्न वार्डों में निर्माण साइटों पर बिना पूर्व सूचना के पहुंचेंगी और यह जांचेंगी कि तय दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। इस कदम का मकसद निर्माण कार्य करने वालों की जवाबदेही तय करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल कागजी निर्देशों तक सीमित न रहकर, वास्तव में जमीन पर लागू किये जायें।

बीएमसी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब मुंबई की वायु गुणवत्ता पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। धूल पैदा करने वाली गतिविधियों को कड़े नियमों के जरिए नियंत्रित करके वायु गुणवत्ता में सुधार को बनाए रखना जरूरी हो गया है।

बीएमसी की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल 22 अक्टूबर तक मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की 'अच्छी' और 'संतोषजनक' श्रेणियों में कुल 231 दिन दर्ज किये गये। यह संख्या 2025 में दर्ज 218 दिनों, 2024 में 216 दिनों और 2023 में 185 दिनों की तुलना में अधिक है।

ये आंकड़े बताते हैं कि जिन दिनों हवा की गुणवत्ता बेहतर एक्यूआई श्रेणियों में रही, उनकी संख्या में सुधार हुआ है , हालांकि हवा की गुणवत्ता का समग्र आकलन प्रदूषकों की मात्रा और शहर के अलग-अलग हिस्सों में उनमें होने वाले बदलावों पर भी निर्भर करता है।

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