वाराणसी , फरवरी 15 -- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित के. एन. उडुपा सभागार में रविवार को 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर एंड एजुकेशन' का उद्घाटन हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय विकसित भारत: ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थ एंड लर्निंग" (एनसीएआईएचसी-2026) है।
इसमें देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, चिकित्सक, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) "विकसित भारत 2047" की परिकल्पना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के केंद्र में है।
उन्होंने कहा कि 146 करोड़ की जनसंख्या और वैश्विक रोग-भार का लगभग 20 प्रतिशत वहन करने वाले भारत के लिए एआई कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने की अनिवार्य आवश्यकता है।
श्रीमती पटेल ने रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार सहित स्वास्थ्य सेवाओं की संपूर्ण श्रृंखला में एआई के एकीकरण के प्रयासों का उल्लेख किया। साथ ही टेलीमेडिसिन के विस्तार, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा भारत-केंद्रित, किफायती एवं स्केलेबल एआई समाधानों के विकास पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई की परिवर्तनकारी क्षमता के साथ मजबूत नियामकीय ढांचा, डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता-वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए है। इसका उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक तरीके से किया जाना चाहिए।
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