वाराणसी , सितंबर 1 -- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा 'वैज्ञानिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अनुप्रयोग' विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन एक से तीन सितंबर तक किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्घाटन शारीरिक शिक्षा विभाग स्थित करण सिंह सभागार में हुआ। मिश्रित माध्यम से आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विषयों के शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी एवं विशेषज्ञ वैज्ञानिक अनुसंधान तथा शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, कंप्यूटर दृष्टि और वर्गीकरण जैसी प्रौद्योगिकियों पर आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। उन्होंने शोधकर्ताओं से इसका प्रभावी उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध कार्य को गति देने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
जिन कार्यों को पूरा करने में पहले एक वर्ष लगता था, उन्हें अब एक माह या 15 दिन में पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों को केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खोज इंजन के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें विषय की गहरी समझ और व्यापक ज्ञान प्रदान करना चाहिए।
आईआईटी-बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. संजय कुमार सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के लिए समर्पित प्रयोगशाला और अधिगम मंच विकसित करने की जानकारी दी। उन्होंने अंतर्विषयक अध्ययन और व्यावहारिक कौशल को महत्वपूर्ण बताया।
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