वाराणसी , फरवरी 20 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी बीएचयू) के स्कूल ऑफ मैटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा "क्वांटम डॉट्स एवं नैनो प्रौद्योगिकी में उभरते रुझान और तकनीकी प्रगति" विषय पर देव एवं वर्धना गोस्वामी व्याख्यान कक्ष परिसर में द्वि-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला भारत-कोरिया संयुक्त पहल के अंतर्गत शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग संवर्धन योजना (एसपीएआरसी) के तहत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न मदन मोहन मालवीय को पुष्पांजलि अर्पित कर तथा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्कूल के समन्वयक प्रो. चंदन उपाध्याय ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि कार्यशाला के संयोजक प्रो. भोला नाथ पाल ने क्वांटम डॉट्स और नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध कार्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इस क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की। अनुसंधान एवं विकास के सह-अधिष्ठाता प्रो. प्रदीप पाइक ने अपने संबोधन में उन्नत सामग्रियों और नैनोविज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को वैज्ञानिक नवाचार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला में देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। दक्षिण कोरिया के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से प्रो. डोह सी. ली ने क्वांटम डॉट प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, भारतीय विज्ञान संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने भागीदारी की।
तकनीकी सत्रों में क्वांटम डॉट्स के संश्लेषण एवं विशेषता निर्धारण, ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोग, जैव-चिकित्सीय उपयोग और नैनोमैटेरियल आधारित उभरती डिवाइस तकनीकों जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला के अंतर्गत मौखिक प्रस्तुतियाँ, पोस्टर सत्र, प्रयोगशाला भ्रमण और संवादात्मक चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक एवं अनुसंधान संबंधी अनुभव प्राप्त हुआ।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित