वाराणसी , फरवरी 5 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में छात्रों के बीच हुई मारपीट को लेकर सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना को जातिगत या यूजीसी की नई नियमावली से जोड़ना भ्रामक है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया ने बताया कि 29 जनवरी और 3 फरवरी को यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर रैलियां निकाली गई थीं, जिनकी अनुमति प्रशासन ने नहीं दी थी। मंगलवार शाम राजाराम छात्रावास में दो छात्रों के बीच मामूली मारपीट हुई, जिसे अनावश्यक रूप से जातीय विवाद का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों छात्र एक ही जाति वर्ग से हैं, इसलिए घटना को जातिगत रंग देना पूरी तरह गलत है।
डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल के अनुसार, मेस में भोजन को लेकर शुरू हुआ विवाद पुरानी बातों और व्हाट्सएप ग्रुप में हुई बहस के कारण बढ़ गया। पीड़ित छात्र की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दोनों छात्र ओबीसी श्रेणी के बताए गए हैं। एहतियातन परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
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