वाराणसी , अप्रैल 30 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में बलिया निवासी बुजुर्ग महिला की गलत सर्जरी और मौत के मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में 14 लोगों को दोषी पाया गया है। इन सभी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बुधवार शाम को आए रिपोर्ट के आधार पर इन 14 दोषियों में अस्थि रोग विभाग, एनेस्थीसिया विभाग, न्यूरोसर्जरी विभाग और नर्सिंग स्टाफ समेत चिकित्सक व कर्मचारी शामिल हैं। ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जरी विभाग में बलिया निवासी राधिका देवी (71) भर्ती थीं। 7 मार्च को उन्हें ऑपरेशन के लिए कर्मचारियों द्वारा अस्थि रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। सीनियर डॉक्टर के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने महिला के पैर में चीरा लगा दिया।

वास्तव में वाराणसी निवासी एक अन्य राधिका देवी (82) का कूल्हे का ऑपरेशन होना था। बड़ी लापरवाही के चलते न्यूरोसर्जरी वाली राधिका देवी को डॉक्टरों ने गलती से चीरा लगा दिया। जब टीम को पता चला कि मरीज का पैर तो ठीक है, तब तुरंत टांके लगा दिए गए।

11 दिनों बाद, मरीज के स्वास्थ्य में सुधार होने पर परिजनों की सहमति से 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी ओटी में उनकी स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में दस दिन रखा गया। 27 मार्च को मरीज की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई।

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