वाराणसी , अक्टूबर 15 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शोधकर्ताओं ने पांच औषधीय पौधों से तैयार आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन 'ओएक्योर' के प्रयोगात्मक अध्ययन में जोड़ों की सूजन कम करने और उपास्थि (कार्टिलेज) को क्षति से बचाने की क्षमता के संकेत पाए हैं। चूहों पर किए गए अध्ययन में उपास्थि के क्षरण और उसके नीचे स्थित हड्डियों की संरचना में भी सुधार के संकेत मिले हैं।

हालांकि, इसके चिकित्सकीय प्रभाव और सुरक्षा की पुष्टि के लिए मनुष्यों पर परीक्षण आवश्यक हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों की दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें उपास्थि धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती है। इससे दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जोड़ की भीतरी झिल्ली में सूजन, उपास्थि की संरचना और हड्डियों में होने वाले बदलावों का मूल्यांकन किया।

प्रयोगात्मक मॉडल में ओएक्योर के उपयोग से जोड़ की भीतरी झिल्ली की सूजन में कमी देखी गई। सूजन से जुड़े जैविक कारकों एनएफ-कप्पा बी और इंटरल्यूकिन-1 बीटा की अभिव्यक्ति भी कम हुई। वहीं, उपास्थि की संरचना से जुड़े टाइप-दो कोलेजन में वृद्धि तथा उसके क्षरण से जुड़े एमएमपी-13 और एडीएएमटीएस-5 जैसे संकेतकों में कमी दर्ज की गई। सूक्ष्म संगणित टोमोग्राफी के जरिए किए गए विश्लेषण में हड्डियों की संरचना से संबंधित कुछ मापदंडों में भी सुधार के संकेत मिले।

ओएक्योर में अश्वगंधा, शतावरी, विदारीकंद, गिलोय और काली मुसली शामिल हैं। अध्ययन में ऊतकों, कोशिकाओं और जीन की अभिव्यक्ति के विश्लेषण के साथ आधुनिक इमेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। शोधपत्र 'प्रयोगात्मक ऑस्टियोआर्थराइटिस में आयुर्वेदिक पोषण पूरक ओएक्योर के उपास्थि-संरक्षण और सूजनरोधी प्रभाव' शीर्षक से 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द इंडियन नेशनल साइंस अकादमी' में प्रकाशित हुआ है।

शोध दल में विभिन्न विभागों से अनिरबान रॉय, रत्ना सहानी, निकिता सिंह, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. संजय यादव और समीर गुप्ता शामिल रहे। शोध का नेतृत्व बीएचयू के विज्ञान संस्थान के प्राणी विज्ञान विभाग के डॉ. अमरेश कुमार सिंह ने किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित