, Sept. 14 -- विशिष्ट अतिथि एवं विशेष कार्याधिकारी (प्रशासन) प्रो. अतुल कुमार शरण ने हिंदी के तकनीकी, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्ष पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभागों एवं कार्यालयों के नाम अंग्रेजी के साथ हिंदी में लिखने तथा हस्ताक्षर सहित दैनिक प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया।गांधी भवन परिसर के निदेशक एवं मुख्य कुलानुशासक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने हिंदी के भविष्य को उज्ज्वल बताते हुए कहा कि हिंदी राजभाषा के साथ ही अघोषित रूप से भारत की राष्ट्रभाषा भी है।
हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. श्याम नंदन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी, मंत्रिमंडल सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन तथा उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली की सचिव दीप्ति गौर मुकर्जी के संदेशों का वाचन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को समृद्ध करने में गैर-हिंदी भाषी लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए हिंदी का विस्तार भारतीय भाषायी विविधता के सम्मान के साथ होना चाहिए।
इस अवसर पर वित्त अधिकारी प्रो. पंकज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी शेफालिका मिश्रा, हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव, संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्याम कुमार झा, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. बिमलेश कुमार सिंह, समाज कार्य विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार सिंह, संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बबलू पाल एवं डॉ. मणिशंकर द्विवेदी सहित शिक्षक, विद्वान, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य एवं हिंदी अधिकारी (अतिरिक्त प्रभार) के संयोजकत्व में हुआ। शोधार्थी विकास कुमार ने मंच संचालन किया तथा डॉ. श्याम नंदन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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