, May 30 -- प्रो. विजय कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का मूल आधार सिद्धांत, सत्य और जनविश्वास है। उन्होंने हिन्दी नवजागरण में महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को रेखांकित करते हुए पत्रकारिता को राष्ट्रहित से जोड़कर देखा। वक्ता डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि पत्रकारिता में समाज को दिशा देने की अपार शक्ति होती है। उन्होंने हिन्दी-उर्दू की साझी पत्रकारिता पर चर्चा करते हुए इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम बताया।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा कि पत्रकारिता समाज की आंख और कान है तथा वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बनकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है।
डॉ. सियाराम मुखिया ने पत्रकारिता को स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जोड़ते हुए कहा कि पिछले दो सौ वर्षों में पत्रकारिता ने जनजागरण और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार झा ने कहा कि पत्रकारों को खबरों के प्रकाशन से पहले तथ्यों की जांच कर सभी पक्षों की जानकारी जुटानी चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता में अनुशासन, संयम और सत्यनिष्ठा को सर्वोपरि बताया।
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