, May 15 -- इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना है। आमतौर पर बिहार के खानपान की चर्चा होते ही लिट्टी-चोखा, चंपारण मटन, मखाना, खाजा और ठेकुआ जैसे व्यंजनों का ही उल्लेख होता है, जबकि राज्य की पाक परंपरा इससे कहीं अधिक समृद्ध और विविधतापूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा योजना में यह प्रावधान किया गया है कि स्ट्रीट फूड हब की कम-से-कम 50 प्रतिशत दुकानों में बिहार के मूल व्यंजन, पारंपरिक मिठाइयां और स्थानीय स्नैक्स अनिवार्य रूप से उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य बिहार के स्थानीय स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

योजना के अंतर्गत चयनित फूड वेंडर्स को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण, साफ-सुथरे तरीके से भोजन तैयार करने तथा ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने जैसे विषय शामिल होंगे। इससे स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि शहरी विकास एवं आवास विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न नगर निकायों से इस प्रकार के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। विभाग द्वारा चयनित प्रस्तावों को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित निकाय को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लगभग चार करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।यदि यह योजना स्वीकृत होती है, तो पटना न केवल आधुनिक स्ट्रीट फूड संस्कृति का नया केंद्र बनेगा, बल्कि बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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