, March 7 -- इस अवसर पर मां श्यामा मंदिर नया समिति के सचिव और जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि पहली बार दरभंगा की पावन धरती पर माँ श्यामा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिथिला क्षेत्र प्राचीन काल से ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध रहा है। दरभंगा राज परिसर का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशिष्ट रहा है और माँ श्यामा मंदिर की स्थापना भी तांत्रिक विधि के अनुसार की गई थी। राज परिवार की चिताओं पर स्थापित इस मंदिर की विशेष आध्यात्मिक महिमा है और इसकी ख्याति देश-विदेश तक फैली हुई है। जिलाधिकारी ने कहा कि मिथिला में शैव और शाक्त परंपरा का गहरा प्रभाव रहा है तथा यह क्षेत्र दार्शनिक चिंतन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। संगीत के क्षेत्र में भी मिथिला का विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि दरभंगा का ध्रुपद घराना भारत के चार प्रमुख ध्रुपद घरानों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इसके साथ ही मिथिला की प्रसिद्ध लोक चित्रकला परंपरा आज विश्व स्तर पर सम्मानित है और यह न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। मिथिला की तांत्रिक चित्रकला अपनी विशिष्ट शैली के माध्यम से अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को भी अभिव्यक्त करती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि माँ श्यामा महोत्सव के अंतर्गत कवि गोष्ठी, विद्वत गोष्ठी, चित्रकला कार्यशाला तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से जिला प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वर्तमान समय के अनुरूप संरक्षित और विकसित करने के लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं।
इस अवसर पर माँ श्यामा मंदिर,दरभंगा राज परिवार तथा दरभंगा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने माँ श्यामा पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निदेशक दीपेश चंद्र तथा प्रस्तावक उज्ज्वल कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म अत्यंत सूचनाप्रद एवं प्रासंगिक है। इसमें माधवेश्वर परिसर सहित मिथिला के प्रमुख काली मंदिरों के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक तत्वों को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस फिल्म में तांत्रिक साहित्य के विद्वान डॉ. मित्रनाथ झा द्वारा महाराजा रमेश्वर सिंह और सर जॉन वुडरफ़ के आध्यात्मिक संबंधों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।
इस अवसर पर माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष प्रो. एस.एम. झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए और महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डाला।
न्यास समिति के उपाध्यक्ष प्रो.जयशंकर झा ने माँ श्यामा महोत्सव को सरकार से शीघ्रता से स्वीकृत करवाने का श्रेय न्यास समिति के संरक्षक सह लोकप्रिय विधायक संजय सरावगी को दिया।
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