, Sept. 21 -- कार्यक्रम में उत्पादक दीदियों के साथ ही देश की प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बतौर क्रेता भाग लिया। इनमें वसंत इम्पेक्स, डीटीपीसी, ड्यूलक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपक्राफ्ट, विजया वेंचर्स और नोबेल संस्था के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल थे।क्रेताओं ने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और निरंतर आपूर्ति को लेकर अपने सुझाव दिए और भविष्य में बड़े ऑर्डर के लिए रुचि दिखाई।

इस अवसर पर बतौर विशेषज्ञ श्रीमती महुआ रॉय चौधरी, कार्यक्रम समन्वयक, जीविका, डॉ. राकेश कुमार सिंह, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका एवं श्रीमती माधवी चौधरी, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका उपस्थित रहीं। उन्होंने दीदियों को उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य निर्धारण और ऑनलाइन मार्केटिंग के गुर सिखाए। विशेषज्ञों ने कहा कि बिहारिका ब्रांड के माध्यम से जीविका उत्पादों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

सरस मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग, बावन बूटी, सुजनी कला, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क, तो वहीं राजस्थान की लाख की चूड़ियां, गुजरात का बंधेज, महाराष्ट्र की पैठणी, गोवा का हस्तशिल्प , पश्चिम बंगाल का जूट शिल्प, असम का बांस शिल्प और दक्षिण भारतीय मसालों के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

जीविका दीदियों द्वारा ही संचालित "शिल्पग्राम महिला उत्पादक समूह लिमिटेड स्टॉल पर राज्य भर से जीविका दीदियों द्वारा बनाये गए परिधान एवं शिल्प को एकत्रित कर प्रदर्शनी सह बिक्री हो रही हैl "मधुग्राम महिला उत्पादक समूह लिमिटेड" के स्टॉल पर शुद्ध एवं पौष्टिक मधु की बिक्री की जा रही है l जीविका दीदियों के अन्य स्टॉल के उत्पाद भी आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं lखादी, सिल्क, मटका, कॉटन, कोशा आदि से बनी साड़ियाँ, सलवार, सूट , नाइटी, फुलकारी, चिकेन कारी जैसे परिधानों की खरीददारी बड़े पैमाने पर बिक्री हो रही हैl वहीं घर सजाने के लिए हस्तशिल्प, कालीन, रग्स, आराम कुर्सी, लैम्प, झूमर, तोरण , कृत्रिम फूल और गमले की भी खरीद -बिक्री जारी है।बच्चों के खिलौने लट्टू, घिरनी, डमरू, किट-किट, योयो ,डुगडुगी चकरी और नेम प्लेट बड़ी संख्या में बिक रहे हैं।

फूड कोर्ट में जीविका दीदी की रसोई के स्टॉल पर लिट्टी-चोखा समेत देशी व्यंजन, अन्य स्टाल पर अचार, पापड़, चाट, आयुर्वेदिक पाचक आदि पारंपरिक व्यंजनों का लोग आनंद ले रहे हैं। व्यंजनों के स्टॉल पर आगंतुक देशी व्यंजनों का स्वाद तो चख ही रहे हैं घर के लिए भी विभिन्न प्रकार के अचार, पापड़, दनवरी, अदवरी, सत्तू, मखाना, कतरनी चावल, चुड़ा और गुड़ का रवा जैसे देशी व्यंजन ले जा रहे हैंl प्राकृतिक सूखे फूल, बोनसाई, सेकुलुन ऑक्सीजन, जैविक रस हल्दी और पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले पौधे भी आगंतुकों को खूब लुभा रहे हैंlमेले में आने वाले आगंतुकों ने कहा कि सरस मेला का आयोजन एक ही छत के नीचे पूरे भारत की संस्कृति को देखने का अद्भुत अवसर है और यहाँ के उत्पाद शुद्ध, जैविक और किफायती हैं।

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