, Sept. 24 -- बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के पारंपरिक हुनर को आधुनिक डिजाइन और नए अंदाज से जोड़कर तैयार किए जा रहे उत्पाद पटना के ज्ञान भवन में आयोजित सरस मेला में युवाओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।अररिया की शीतला देवी जूट से खिलौने, बैग और घर सजाने की वस्तुएं तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ 20 जीविका दीदियां इस काम से जुड़ी हैं। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने जूट उत्पादों में अलग-अलग डिजाइन तैयार करना शुरू किया है। उनके अनुसार, युवा इन उत्पादों को पसंद कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ऐसे सामान अन्य जगह आसानी से नहीं मिलते।
मधुबनी की पूनम देवी वर्ष 2010 से जीविका से जुड़ी हैं और 2022 से सरस मेला में अपने उत्पाद लेकर पहुंच रही हैं। उनके स्टॉल पर मिथिला पेंटिंग, सिक्की और पेपरमेशी से तैयार उत्पाद उपलब्ध हैं।
अरवल की रिंकी देवी ने बताया कि उनके स्टॉल पर लकड़ी से बने विभिन्न उत्पाद युवाओं और बच्चों को पसंद आ रहे हैं।
सुपौल की मिक्की देवी मिथिला पेंटिंग को आधुनिक उत्पादों के रूप में लोगों तक पहुंचा रही हैं। उन्होंने बताया कि 10 से 12 जीविका दीदियां इस काम से जुड़ी हैं। सोशल मीडिया के कारण मिथिला पेंटिंग युवाओं के बीच लोकप्रिय हुई है और फैशन के तौर पर इसकी मांग भी बढ़ी है।
सरस मेला में पारंपरिक कला और आधुनिक सोच का यह संगम ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उद्यमिता को नई पहचान देने के साथ स्थानीय उत्पादों को नए बाजार से जोड़ रहा है।
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