, July 23 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 38 इंजीनियरिंग कॉलेज तथा 46 पॉलिटेक्निक संस्थान कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज मात्र 10 रूपये के शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पॉलिटेक्निक संस्थान में मात्र पांच रूपये के शुल्क पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है तथा राज्य में कुशल मानव संसाधन तैयार हो रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में लैंग्वेज लैब की भी स्थापना की गयी है, जहां छात्र जापानी, जर्मन, फ्रेंच आदि भाषायें सीख रहे हैं। श्री चौधरी ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा सक्षम बनाना है कि वे स्वयं उद्यम स्थापित कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला), पटना का स्थायी परिसर महिलाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रमुख केंद्र बनेगा तथा समृद्ध बिहार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्किल इंडिया मिशन की शुरूआत की और इसके लिये उन्होंने अलग मंत्रालय बनाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में देश के स्किल्ड युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को पूरा करने के लिये बिहार के युवा संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। बिहार की बहनें, बेटियां स्किल्ड होकर देश को आगे बढ़ायेंगी।

कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार और भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान भी किया गया। इसे बिहार के युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देकर विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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