, Aug. 17 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से प्राप्त 6.42 लाख आवेदनों में 96 प्रतिशत मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। शिकायत पर 10 दिन तक कार्रवाई नहीं होने पर 11वें दिन स्वतः पहला नोटिस, 20वें दिन दूसरा और 25वें दिन तीसरा नोटिस जारी होता है। इसके बाद भी 30 दिन तक समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की व्यवस्था है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।श्री चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके अपने राज्य में उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी न हो। इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक राज्य में सरकारी डिग्री कॉलेजों की संख्या सीमित रही, लेकिन अब एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। साथ ही 342 बी.एड. कॉलेजों में डिग्री पाठ्यक्रम की सहमति से उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 10 रूपये में इंजीनियरिंग और 05 रूपये में पॉलिटेक्निक शिक्षा जैसी पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से करीब 18,000 करोड़ रूपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। 534 प्रखंडों और प्रमुख शहरों को मिलाकर 551 स्थानों पर मॉडल स्कूल व्यवस्था विकसित करने तथा विद्यार्थियों को घर से पढ़ाई के लिए लाइव शिक्षक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित