, Aug. 17 -- श्री चौधरी ने कहा कि बिहार की प्रगति में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा एवं सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। आंगनबाड़ी, पोषण, पोशाक तथा मैट्रिक, इंटर और स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत तथा पंचायती राज एवं स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने उनकी भागीदारी को नई मजबूती दी है।मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि बिहार आज विकास और परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि झारखंड विभाजन के समय लगभग 6 हजार करोड़ रूपये के बजट से आगे बढ़ते हुए राज्य का बजट अब तीन लाख 47 हजार करोड़ रूपये के स्तर तक पहुंचा है। बिहार की पहचान केवल अपने वर्तमान विकास से नहीं, बल्कि पाटलिपुत्र, नालंदा, विक्रमशिला और आचार्य चाणक्य की महान ज्ञान परंपरा से भी है। इस गौरवशाली विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए बिहार को विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी है।
मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ही बिहार की समृद्धि और विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा।उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि बिहार का कोई भी विद्यार्थी अवसरों के अभाव में पीछे न रहे और शिक्षा, कौशल एवं रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य के साथ-साथ राज्य और देश के भविष्य को भी नई दिशा दे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी समस्यायें और सुझाव खुलकर सरकार तक पहुँचायें। बिहार के विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे तभी बिहार समृद्ध होगा और विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होगा।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाईगर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सुहैल, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन, युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के सचिव कौशल किशोर, पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय के कुलपति उपेन्द्र प्रसाद, जे.डी. विमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. मीरा कुमारी सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं छात्रायें उपस्थित थीं।
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