, Sept. 26 -- मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और नियमित रूप से विद्यालय आएं, जिससे पाठ्यक्रम को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सातवीं और आठवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों के करियर की मजबूत नींव तैयार होती है। पढ़ाई के इन वर्षों में की गई मेहनत आगे के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। श्री चौधरी ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का अनावश्यक उपयोग नहीं करने तथा आवश्यकता के अनुसार उसका सदुपयोग पढ़ाई के लिए करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से होमवर्क करें, पाठ्यक्रम का अभ्यास करते रहें और यथासंभव विद्यालय में ही पढ़ाई को अच्छी तरह समझें। विशेष परिस्थिति में ही कोचिंग का सहारा लेने की आवश्यकता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था या सुविधाओं में सुधार के संबंध में यदि कोई सुझाव हो तो अभिभावक उसे अवश्य साझा करें। उनके सुझावों से न केवल संबंधित विद्यालय बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव के संबंध में भी अभिभावकों से सुझाव देने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि अगले वर्ष से सभी सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसके लिए दो-तीन स्कूलों पर एक इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिससे विद्यार्थियों को कंप्यूटर की शिक्षा नियमित रूप से मिल सके। बिहार में लगभग 700 स्थानों पर मॉडल स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षकों एवं लाइव क्लास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक माध्यमों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
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