, Oct. 28 -- श्री चौधरी ने कहा की बिहार में उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने बिहार एमएसएमई नीति-2026 को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की और से अनुमोदित इस नीति का मूल उद्देश्य 'एक करोड़ उद्यमी परिवार, सशक्त बिहार का आधार' की परिकल्पना को साकार करना है। नीति के तहत पांच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने और एक करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा राज्य में साख-जमा अनुपात को 75 प्रतिशत तक पहुंचाने, प्रत्येक जिले में एक क्लस्टर विकसित करने और सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है।इस नीति में उद्यमों के औपचारिकीकरण, कौशल विकास, क्लस्टर आधारित विकास, वित्त और बाजार तक पहुंच, तकनीकी उन्नयन तथा पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष जोर दिया गया है। बिहार उद्यम पहचान संख्या और एकीकृत एमएसएमई पोर्टल के माध्यम से उद्यमों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने तथा बिहार एमएसएमई निधि और ग्रोथ फंड के जरिये वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। बिहार मार्ट और एमएसएमई मंडपम के माध्यम से बाजार तक पहुंच बढ़ाने की भी व्यवस्था की गयी है।

मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना (सीएम-सीडीपी)-2026 को भी घटनोत्तर स्वीकृति दी है। इसका उद्देश्य राज्य में एमएसएमई का सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करना तथा नवाचार एवं सामूहिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत पारंपरिक शिल्पकारों और उद्यमों के लिए सामान्य सुविधा केंद्र स्थापित किये जाएंगे। इससे हस्तशिल्प, हस्तकरघा, लुप्त होती कलाओं और एमएसएमई आधारित स्वयं सहायता समूहों की उत्पादकता, गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। योजना में प्रौद्योगिकी उन्नयन, कौशल विकास, उत्पादों के मानकीकरण, बेहतर पैकेजिंग, बाजार तक पहुंच, पूंजी उपलब्धता और निर्यात प्रोत्साहन पर भी जोर दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और शिल्पकारों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राज्य में स्वच्छ ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए बिहार बायो-फ्यूल एवं कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2026 लागू करने की पहल को मंजूरी दी गयी है। इसके क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग को नोडल एजेंसी और उद्योग निदेशक को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट, नगर ठोस अपशिष्ट और प्रेस-मड का वैज्ञानिक उपयोग कर सीबीजी एवं बायो-फ्यूल परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। परियोजनाओं के पंजीकरण, अनुश्रवण, उत्पादन, फीडस्टॉक के उपयोग, एफओएम/एलएफओएम उत्पादन और रोजगार की निगरानी के लिए सिंगल विंडो पोर्टल एवं सीबीजी एमआईएस की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही गोबरधन और सैटैट जैसी राष्ट्रीय पहलों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया है।

मंत्रिमंडल ने किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित गलगलिया चेक पोस्ट पर मेसर्स ईस्टर्न एग्रो केमिकल्स लिमिटेड को 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता की मेज स्टार्च उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए 88.62 करोड़ रुपये के निजी पूंजी निवेश की स्वीकृति दी है। इकाई की स्थापना से 217 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कामगारों को रोजगार मिलने की संभावना है।

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