, Sept. 30 -- बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ.चंद्रशेखर सिंह ने नदियों के जलस्तर एवं तटबंधों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार नेपाल की ओर से अब तक सबसे अधिक पानी आया है। बगहा, रेवा घाट, लालगंज एवं गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर (एचएफएल) रिकॉर्ड किया गया है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से अभी ऊपर बह रहा है लेकिन पानी धीरे-धीरे घट रहा है। डुमरिया पुल के समीप नदी का जलस्तर स्थिर होने तथा पानी का दबाव कम हो रहा है। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में बाढ़ की वर्तमान स्थिति तथा संचालित राहत एवं बचाव कार्यों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। कोसी एवं महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, जिससे बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जा सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए हर स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं तथा अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का नियमित संचालन किया जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों को चिन्हित कर दशहरा से पहले 7,000 रूपये प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। राज्य सरकार द्वारा कुछ दिन पूर्व बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7,000 रूपये की अनुग्रह सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने पानी की निकासी के लिए आवश्यकता के अनुसार स्लुइस गेट खोलने, नदियों के जलस्तर, तटबंध एवं कटाव की सतत् निगरानी रखने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन एवं अन्य राहत सामग्री पहुंचाने तथा पशुओं के लिए भी समुचित चारा एवं आश्रय की व्यवस्था करने को कहा।

मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को एसओपी के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। बाढ़ से हुए नुकसान को दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक रसोई का संचालन तब तक जारी रखा जाए, जब तक लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती। एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की तैनाती सुनिश्चित रखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी रखने का भी निर्देश दिया।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद डॉ.संजय कुमार जायसवाल, सांसद सुनील कुमार, विधायक संजय कुमार पांडे, विधायक विनय बिहारी, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रीता वर्मा, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ.चंद्रशेखर सिंह, चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक हरकिशोर राय, पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारी श्री तरनजोत सिंह, पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम सहित अन्य जनप्रतिनिधि, वरीय अधिकारी एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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