, Aug. 4 -- बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ तथा अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ये स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे भविष्य में यहां पर्यटकों की पहुंच और अधिक आसान होगी।विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्रागैतिहासिक महत्व और पुरातात्विक संभावनाओं से समृद्ध यह क्षेत्र बिहार के नए हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित हो सकता है। इन स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित विकास के बाद इन्हें भविष्य में यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास अत्याधुनिक लिडार तथा जीपीआर तकनीक से सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। इन तकनीकों के माध्यम से बिना खुदाई किए जमीन के भीतर मौजूद संभावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान की जा सकेगी। इससे भविष्य के उत्खनन कार्य अधिक सटीक और प्रभावी होंगे।
बैठक में सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर भी विशेष बल दिया गया।
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