, Aug. 7 -- श्री सरावगी ने कहा कि संत रविदास जी ने सदियों पहले जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, समानता और बंधुत्व का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का एक व्यापक जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ना है।उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संत रविदास जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने, जातिवाद की मानसिकता को समाप्त करने तथा विकसित भारत और विकसित बिहार के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, समता और सेवा का संदेश और अधिक सशक्त होगा।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों एवं कार्यकर्ताओं ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के समरस समाज के संकल्प को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।

अन्य वक्ताओं ने कहा कि गुरु रविदास जी का जीवन सामाजिक न्याय, समान अवसर, मानव गरिमा और बंधुत्व की प्रेरणा देता है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। अभियान के माध्यम से राज्य के प्रत्येक गांव, प्रत्येक मंदिर और समाज के हर वर्ग तक उनके संदेश को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है,जिससे सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इस अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार, मंत्री रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, दिलीप जायसवाल, नंद किशोर राम, लखेंद्र पासवान, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, मिथिलेश तिवारी, बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन, बिहार विधानसभा के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया, विधायक रत्नेश कुशवाहा, विधायक संजय गुप्ता, विधायक सुजीत पासवान, विधायक अनिल राम, विधायक संगीता राम, विधायक महेश पासवान, पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, सीता साहू बड़ी संख्या में पूज्य साधु-संत, मंदिर समितियों के पदाधिकारी, पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए हजारों कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।

कार्यक्रम में मंच संचालन पूर्व मंत्री जनक राम ने किया।

कार्यक्रम का समापन संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के जयघोष तथा सामाजिक समरसता के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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