, Oct. 5 -- बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रोसीजर और सर्जरी की संख्या पिछले माह के 1,728 से बढ़कर 2,098 हो गई है। इसके साथ ही क्लेम राशि में करीब 30 लाख रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।हालांकि अरवल, जहानाबाद, पूर्णिया, शेखपुरा, शिवहर, समस्तीपुर, औरंगाबाद, बक्सर और सहरसा में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन सरकारी एवं सदर अस्पतालों का प्रदर्शन निजी अस्पतालों से कम है, वहां जवाबदेही तय की जाएगी। आयुष्मान भारत से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने तथा नियमानुसार चिकित्सकों को प्रोत्साहन राशि देने में किया जाएगा।

स्वास्थ्य सचिव ने पीएचसी, सीएचसी, अनुमंडलीय एवं जिला अस्पतालों को अपनी क्षमता के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही मरीजों का उपचार करने का निर्देश दिया, जिससे अनावश्यक रेफरल को रोका जा सके।

सभी सिविल सर्जन, अस्पताल उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधकों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की समीक्षा बैठक करने को कहा गया। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में 'कायाकल्प' योजना के मानकों के अनुरूप स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की समयबद्ध उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक एवं ऐप-आधारित अटेंडेंस व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अक्टूबर माह में जिला अस्पतालों को जनरल सर्जरी ओटी के लिए 14 प्रकार, गायनी ओटी के लिए 17 प्रकार और ऑर्थो ओटी के लिए 16 प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा 14 स्थानों पर सी-आर्म मशीनें स्थापित की जा रही हैं। अधिकांश उपकरणों का इंस्टॉलेशन 15 से 20 अक्टूबर तक तथा शत-प्रतिशत इंस्टॉलेशन 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। सभी उपकरणों की केटीएल पोर्टल पर प्रविष्टि तथा एएमसी/सीएमसी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बैठक के समापन पर स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने सभी जिलों को उपलब्ध डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों को ऐसी मजबूत स्वास्थ्य इकाई के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को समय पर, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।

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