, Aug. 30 -- विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. निशिकांत ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गीतम्, नाटकम्, स्तोत्र-पाठ, अभिनय सहित विभिन्न विधाओं में प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और संस्कृत के प्रति अभिरुचि का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।वक्ताओं ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और संस्कृत भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण संवाहिका है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सामूहिकता, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुधीर कुमार ने किया। मुख्य अतिथि को सम्मान आयोजन समिति के सदस्य डॉ. रामसेवक झा ने किया। स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के छात्र विश्वमोहन झा ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की संचालिका सहायक प्राध्यापिका डॉ. साधना शर्मा थीं, जबकि सत्र संयोजन का दायित्व सहायक प्राचार्य डॉ. कमलेन्द्र चक्रपाणि ने संभाला। सह-संचालक डॉ. रामसेवक झा थे।
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