, Aug. 7 -- मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दलित समाज की बेटियों को शिक्षा के लिए गांव से बाहर जाने में कठिनाई होती थी। इसे ध्यान में रखते हुए बिहार के सभी जिलों में माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर आवासीय छात्रावास के साथ विद्यालय खोले जा रहे हैं। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का भी स्पष्ट निर्देश है कि शिक्षा के केंद्र के रूप में बिहार को आगे बढ़ाया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी भाषाओं और शिक्षा की व्यवस्थाओं को आबादी के अनुरूप विकसित करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों पर जितना ध्यान दिया जाता है, उससे कम ध्यान किसी भी कीमत पर संस्कृत शिक्षा पर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किशनगंज में बड़ी आबादी को देखते हुए वहां उर्दू विद्यालय खोलने की आवश्यकता है, सरकार इस दिशा में काम करेगी। राष्ट्र और राष्ट्रवाद के प्रति पूरी निष्ठा रखने वाला हर व्यक्ति इस देश की विकास यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगले एक-दो वर्षों में ऐसी व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है जिससे मंत्री, विधायक और जिला पदाधिकारियों के बच्चे भी सरकारी विद्यालयों में पढ़ें। जब सक्षम परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे, तभी यह माना जाएगा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आया है। सरकारी विद्यालयों में नीट और जेईई की तैयारी के साथ लाइव कक्षाओं की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को रात 11 बजे भी ऑनलाइन शिक्षक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस व्यवस्था को 15 अगस्त से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य है कि गरीब परिवार का बच्चा भी कॉन्वेंट या बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की तरह हर समय शिक्षक की मदद प्राप्त कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े, इसके लिए सरकार ने 211 डिग्री कॉलेज खोलने का काम किया है। प्रत्येक कॉलेज में शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी। 10 तारीख तक डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। अस्सिटेंट प्रोफेसर की बहाली की प्रक्रिया पूरी की जा रही है तथा करीब 9,000 अतिरिक्त पद सृजित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीआरई०-4 के तहत करीब 32 हजार शिक्षकों की बहाली की जा रही है। बिहार की प्राचीन शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के प्रयासों से पुनर्स्थापित किया गया है। अब भागलपुर में प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित किया जाएगा। इसके लिए करीब 220 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है और अगले एक वर्ष में इसे धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाएगा।
श्री चौधरी ने कहा कि बिहार के लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार से बाहर जाकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर बिहार सरकार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से करीब 18 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जबकि सक्षम परिवारों द्वारा करीब एक लाख करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि ऐसी व्यवस्था बिहार में ही विकसित की जाए, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़े।
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