, Sept. 22 -- कार्यक्रम के दौरान मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद ने पटना जू में गैंडे के बाड़े में पहुंचकर अपने हाथों से उसे चारा खिलाया। उन्होंने गैंडे के संरक्षण, स्वास्थ्य और देखभाल की व्यवस्था की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में गैंडा संरक्षण में योगदान देने वाले दैनिक कर्मियों और चिकित्सकीय पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंत्री ने संरक्षण कार्य में प्रत्यक्ष रूप से जुटे कर्मियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर बताया गया कि दुनिया में गैंडों की पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें भारतीय एक सींग वाला गैंडा पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है। विश्व में गैंडों की कुल संख्या करीब 28 से 30 हजार के बीच बताई जाती है, जबकि भारतीय एक सींग वाले गैंडों की संख्या लगभग चार हजार है। गैंडे की सींग के लिए अवैध शिकार इसकी आबादी के लिए लंबे समय से बड़ा खतरा रहा है। संरक्षण और सुरक्षा उपायों के कारण गैंडों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

बिहार में गैंडा संरक्षण के विस्तार से जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। जिस प्रकार पर्यटक असम के काजीरंगा और पश्चिम बंगाल के वन क्षेत्रों में गैंडा देखने पहुंचते हैं, उसी तरह भविष्य में वीटीआर और राजगीर जू सफारी भी गैंडा दर्शन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं। इससे बिहार में वन्यजीव आधारित पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है।

मौके पर विभाग के मुख्य वन संरक्षक (आईटी) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास) अमित कुमार, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक पटना डॉ. नेसामणि, जू निदेशक हेमंत पाटिल, बिहार वेटनरी कॉलेज के डीन डॉ. पल्लव शेखर समेत विभागीय पदाधिकारी, पशु चिकित्सक, वनकर्मी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित