पटना , फरवरी 07 -- बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज का यह अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक दिन हमारे लोकतांत्रिक इतिहास, संसदीय परंपराओं और जनआकांक्षाओं की सतत यात्रा का प्रतीक है।
श्री कुमार ने शनिवार को यहां बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस के अवसर पर पर 'सशक्त विधायक सशक्त लोकतंत्र' विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह एक संवैधानिक संस्था के साथ बिहार की आत्मा, उसकी लोकतांत्रिक चेतना और जनसरोकारों की अभिव्यक्ति का सशक्त मंच रही है। उन्होंने कहा कि अपने गठन के बाद से यह सदन सामाजिक न्याय, समानता, समावेशन और विकास के विचारों को स्वर देने का केंद्र रहा है और स्वतंत्रता के पहले से लेकर आज तक इस सभा ने अनेक ऐतिहासिक निर्णयों, विचारोत्तेजक विमर्शों और जनहितकारी कानूनों के माध्यम से देश के संसदीय इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि आज के इस व्याख्यान कार्यक्रम का उद्देश्य वर्तमान चुनौतियों पर आत्ममंथन करते हुए भविष्य की दिशा को स्पष्ट करना है। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि संस्थाओं की गरिमा, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और नागरिकों की सहभागिता से सुदृढ़ होता है और विधान सभा इस लोकतांत्रिक तंत्र की धुरी है, जहाँ जनता की आवाज नीतियों और कानूनों का रूप लेती है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि "यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज के इस कार्यक्रम में देश के संसदीय लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच से जुड़े लोक सभा अध्यक्ष उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि उनका संसदीय अनुभव, दृष्टि और मार्गदर्शन न केवल इस कार्यक्रम को गरिमा प्रदान करता है, बल्कि हमारे जनप्रतिनिधियों और विधान सभा सचिवालय के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
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