, July 24 -- श्री मिश्रा ने कहा कि जब सरकार के विभिन्न विभाग स्वयं अपने आधिकारिक दस्तावेजों में 'भूमिहार ब्राह्मण' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, तब विधानसभा में यह कहना कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, गलत है।"देखते ही देखते यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का रूप में उभर आया । भूमिहार समुदाय से जुड़े कई भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा के समर्थन में खड़े हो गए और सदन में सरकार के रुख के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि यह केवल शब्दावली का नहीं, बल्कि समुदाय की ऐतिहासिक पहचान और दस्तावेजी अधिकारों का प्रश्न है।

भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने भी सरकार के जवाब की आलोचना करते हुए कहा कि वर्ष 1931 की जनगणना से लेकर अनेक पंजीकरण अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों में इस समुदाय को "भूमिहार -ब्राह्मण" के रूप में दर्ज किया गया है।

उन्होंने बहस के दौरान कहा, "यदि सरकार हमें भूमिहार- ब्राह्मण के रूप में मान्यता देने से इनकार करती है, तो उसे हमारे समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने पर विचार करना चाहिए।" उन्होंने समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अनेक भूमिहार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और आरोप लगाया कि सरकार समुदाय की ब्राह्मण पहचान को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।

सदन में इन टिप्पणियों के बाद बहस और तेज हो गई तथा भूमिहार समुदाय से जुड़े विधायकों ने सरकार के रुख पर असंतोष व्यक्त किया।

हालांकि सरकार अपने रुख पर कायम रही और दोहराया कि बिहार के सरकारी अभिलेखों में "भूमिहार" ही आधिकारिक रूप से मान्य जाति का नाम है तथा इस नामकरण में बदलाव का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

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