, Feb. 16 -- उद्योग मंत्री ने विधायक श्री रजक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में कोई भी इथेनॉल प्लांट बंद नही हुआ है। उन्होंने कहा कि दिसंबर महीने में 23 से 31 तारीख के बीच कुछ प्लांट रख रखाव के लिए 7 दिन तक के लिये बंद थे, लेकिन सरकार के पास किसी प्लांट के लम्बे शटडाउन की कोई सूचना नही है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने इथेनॉल कंपनियों को राहत और इंसेंटिव देने के लिए 1700 करोड़ का प्रावधान किया है, जिसके तहत उनकी सहायता की जा रही है।

इससे पहले आज अल्पसूचित सवाल करते हुए विधायक श्याम रजक ने एक स्थानीय हिन्दी दैनिक में 30 दिसम्बर, 2025 को प्रकाशित एक खबर का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में एथेनॉल की खरीद में कमी के निर्णय के कारण इसका उत्पादन करने वाले प्लांट बंद हो रहे हैं, जिसके चलते उद्योग लगाने वालों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, उनकी पूंजी डूब रही है और बड़ी संख्या में कामगार बेरोजगार हो रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 08 दिसंबर को मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के बक्सर जिले में एक औद्योगिक संस्थान जो आश्वासन दिया था कि सरकार इथेनॉल उत्पादन की शतप्रतिशत खरीद की व्यवस्था करेगी। उन्होनें कहा कि सरकार के आश्वासन के बाद प्रदेश में किसानों ने मक्के का उत्पादन बढ़ा दिया है, लेकिन इथेनॉल की खरीद कम होने से उद्यमियों ने उनसे मक्के की खरीद बंद कर दी है और किसान लागत से भी कम दाम पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर हैं।

विधायक श्री रजक ने अन्य राज्यों में सरकार की तरफ से इथेनॉल खरीद का विवरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सरकार 50 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 53, झारखंड में 57, कर्नाटक में 58, हिमाचल प्रदेश में 72, पंजाब में 65, हरियाणा में 70 और बंगाल में 67 प्रतिशत की खरीद कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बिहार में इथेनॉल से जुड़े उद्यमियों और मक्का किसानों के हितों की रक्षा कैसे करेगी इसे सदन को बताए।

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