, Jan. 16 -- राजस्व प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा द्वारा 'भूमि सुधार जन कल्याण संवाद' कार्यक्रम की शुरुआत पटना जिले से की गई थी। इसके बाद लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया एवं भागलपुर में जनकल्याण संवाद आयोजित किए गए, जिनमें आम लोगों ने अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रखीं। इन संवादों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर राजस्व प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।

निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी राजस्व कार्यालयों में आमजनों के साथ सम्मानपूर्ण एवं शालीन व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कार्यालय परिसरों में पेयजल, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता अनिवार्य होगी। इसके लिए मुख्यालय स्तर से अलग से आवंटन भेजे जाने की भी व्यवस्था की जा रही है।आम नागरिकों से प्राप्त शिकायतों का डिजिटल संधारण अनिवार्य किया गया है, जिससे उनके त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए सुगम एवं पारदर्शी प्रणाली विकसित की जा सके।

निर्देश के अनुसार, प्रमंडलीय आयुक्त अपने-अपने प्रमंडलों में तथा समाहर्ता अपने जिले में राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। उनका मुख्य दायित्व होगा कि राजस्व से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम किया जाए और जीवन स्तर में सुधार हो।

राज्य सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक ठोस पहल माना जा रहा है, जिससे राजस्व विभाग आम नागरिकों के और अधिक करीब आएगा और जनविश्वास को मजबूती मिलेगी।

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