, July 23 -- मंत्री ने बताया कि राज्य के सभी नौ प्रमंडलों में चलंत मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ संचालित हैं, जो दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचकर किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर उनका परीक्षण कर रही हैं तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा रही हैं।श्री सिन्हा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य में 1.50 लाख मिट्टी नमूनों की जाँच एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1.35 लाख मिट्टी नमूनों का संग्रहण किया जा चुका है तथा विभिन्न मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में परीक्षण का कार्य प्रगति पर है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के 629 चयनित पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉइल टेस्टिंग लैब की स्थापना की जा रही है। इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामीण समुदाय में भी वैज्ञानिक खेती एवं मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता का विस्तार होगा।
श्री सिन्हा ने राज्य के सभी किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जाँच अवश्य कराएँ तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए सुझावों के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनेगी तथा किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
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