, April 9 -- श्री सिन्हा ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और इच्छुक पक्षकारों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नामित किए जाएंगे, जिन्हें व्यवहारा न्यायालय के समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी और वे अधिकतम 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है या आपत्तियाँ खारिज हो जाती हैं, तो समाहर्ता संबंधित संपत्तियों का प्रभावी कब्जा लेने की कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि कब्जा लेने के बाद संपत्तियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, जिनमें ऐतिहासिक एवं विरासत संपत्तियाँ, सरकारी कब्जे वाली संपत्तियाँ, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली संपत्तियाँ तथा बिना दस्तावेज वाले कब्जे शामिल हैं।

उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा ने स्पष्ट किया कि नियमावली में लंबे समय से रह रहे वैध अधिभोगियों को राहत देते हुए पूर्ण स्वामित्व में रूपांतरण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 40 वर्ष से प्रभावी कब्जे को मानक माना गया है तथा 01 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जो अधिभोगी इस तिथि से पूर्व से कब्जे में हैं और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, उन्हें निर्धारित राशि का भुगतान कर संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में परिवर्तित करने का अवसर मिलेगा।

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