, April 3 -- उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नए निर्देशों के अनुसार "सक्षम न्यायालय" में दिवानी/व्यवहार न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय शामिल होंगे। इसके अलावा डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिश्नर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय तथा बिहार भूमि न्यायाधिकरण को भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में रखा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि "लंबित" का अर्थ केवल वही वाद होगा जो विधिवत दायर होकर न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो और जिसमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया हो, नोटिस निर्गत हुआ हो या स्थगन/अंतरिम आदेश जैसे स्टे ऑर्डर, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा अथवा स्टेटस को प्रभावी हो। केवल किसी आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन का दायर होना "सक्षम न्यायालय में लंबित" नहीं माना जाएगा। श्री सिन्हा ने कहा कि यदि किसी सक्षम न्यायालय की ओर से स्पष्ट स्थगनादेश या अंतरिम आदेश प्रभावी नहीं है, तो राजस्व अधिकारी नियमानुसार अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे और दाखिल-खारिज मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि दायर वाद की अभिप्रमाणित प्रति में स्पष्ट रूप से स्वीकारण अंकित नहीं है, तो उसे भी "लंबित" नहीं माना जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वास्तविक क्रेताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए और भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करते हुए राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा सुनिश्चित करें।

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