, April 8 -- उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कई स्थानों पर ऐसी भूमि मौजूद है जिसका विधिवत सर्वेक्षण नहीं हुआ है या जिसकी प्रविष्टि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। इन जमीनों की सही पहचान और अभिलेखीकरण आवश्यक है, जिससे भूमि प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
श्री सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार भूमि संबंधी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि का सर्वेक्षण और उसका अभिलेखीकरण होने से भविष्य में भूमि विवादों के समाधान, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि उपलब्ध कराने में भी सहूलियत होगी।
उपमुख्यमंत्री ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने-अपने जिलों में ऐसी भूमि का सत्यापन कर उसकी सूची समय सीमा के भीतर विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे बैठक में समुचित जानकारी के आधार पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
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