, Oct. 21 -- कृषि मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के तहत विभिन्न कृषि योजनाओं को एकीकृत कर चयनित गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। सरसों उत्पादक क्षेत्रों में प्रत्येक गांव में 10 बी-बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा 25 एकड़ क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई की व्यवस्था और 10 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इन पहलों से जल संरक्षण, कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग और जैविक खाद को प्रोत्साहन मिलेगा।

श्री सिन्हा ने बताया कि कार्यक्रम के तहत 18,000 किसानों को खेतों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 3,600 किसानों को भ्रमण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित कराया जाएगा। बामेती, पटना की ओर से 240 कृषि अधिकारियों एवं कर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम की निगरानी के लिए प्रत्येक फसल प्रत्यक्षण भूखंड की जियो-टैगिंग और डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जाएगा। डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत 0.5 से तीन एकड़ भूमि वाले पात्र किसानों को नियमानुसार योजना का लाभ मिलेगा।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट प्रतिमाह जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। प्रत्येक फसल के कम से कम तीन फसल कटनी प्रयोगों के माध्यम से उत्पादन एवं उत्पादकता का आकलन भी किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु के अनुरूप वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने के साथ कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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