, April 29 -- विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि सुशासन के कार्यक्रम (2020-25) के तहत सात निश्चय-2 के अन्तर्गत सभी राजकीय पॉलिटेकनिक संस्थान में उभरते हुए तकनीक में उच्चस्तरीय 'सेंटर ऑफ एक्सेलेंस' आईआईटी, पटना के सहयोग से संचालित है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ये 'सेंटर ऑफ एक्सेलेंस' इलेक्ट्रीकल व्हीकिल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन्टरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, 3 डी प्रिन्टिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी इत्यादि के क्षेत्र में विकसित किए गए है, जिसकी कुल लागत कुल राशि 97 करोड़ है। दूसरे चरण में ट्रांसफॉर्मर निर्माण एवं मरम्मती तथा ऑप्टिकल फाईबर को शामिल किया गया है, जिसकी कुल लागत राशि 122.86 क है। द्वितीय चरण में कुल 33 सेंटर ऑफ एक्सेलेंस में अब तक 23 का निर्माण पूरा कर लिया गया है। शेष 10 का कार्य शीघ्र ही पूर्ण कर लिया जाएगा।
सचिव ने कहा कि राज्य के तीन जिलों पूर्वी चम्पारण, जमुई एवं पूर्णियों में डिजिटल तारामंडल / स्पेस एण्ड एस्ट्रोनोमी एडुकेशन सेंटर की स्थापनार्थ कुल अनुमानित व्यय कुल राशि 39.00 करोड़ मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदान की गई है तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्माण कार्य आरम्भ करने का लक्ष्य है। इसके अलावा रीजनल साइंस सेंटर, गया में फन साइंस एंड टेक्नोलॉजी हेरिटेज, चिल्ड्रेन गैलरी के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरणों से लैश मल्टी डाइमेंशनल प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया है।
विभागीय सचिव श्री सिंह ने बताया कि राजकीय इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के छात्रों को ससमय रोजगार मुहैया कराने के लिए राज्य स्तर पर नियोजन कमिटी एवं संस्थान स्तर पर नियोजन सेल संचालित है। राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों से राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थान के छात्र/छात्राओं का नियोजन आज देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हो रहा है। वर्ष 2025-26 में करीब 15 हजार 246 बच्चों को विभिन्न निजी कंपनियों में रोजगार मिले हैं।
इस मौके पर राज्य वैधिक शिक्षा पर्षद सचिव सह निदेशक अहमद महमुद, तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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