, April 16 -- सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के डीआईजी मुकेश कुमार ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विकासात्मक गतिविधियां स्थानीय समुदाय के विश्वास एवं सहभागिता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारत सरकार, गृह मंत्रालय के निदेशक मनीष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के माध्यम से सीमावर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाओं, आजीविका एवं कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सशक्त बनाया जा रहा है, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक दीपक कुमार ने कार्यक्रम के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डेटा प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग एवं आईटी आधारित समाधानों की भूमिका को रेखांकित किया।
इस कार्यशाला में सीमावर्ती जिलों, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा आदि के जिला पदाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अन्य अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया तथा इन सीमावर्ती जिलों के जिला योजना पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री मयंक वरवड़े, मूल्यांकन निदेशालय के निदेशक रविश किशोर, विभाग में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II की सहायक नोडल पदाधिकारी सुजाता कुमारी एवं अन्य संबंधित हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें कार्यक्रम के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए।
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