, May 12 -- औद्योगिक क्षेत्रों को आवंटन स्थिति के आधार पर "अनसैचुरेटेड", "नॉर्मल" और "सैचुरेटेड" श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। वहीं प्राइम लोकेशन वाले अथवा एक से अधिक आवेदकों वाले भूखंडों का आवंटन ई-ऑक्शन एवं ई-बिडिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके। नई नीति के अनुसार माइक्रो एवं स्मॉल इकाइयों के लिए 02 प्रतिशत तथा मीडियम एवं लार्ज इकाइयों के लिए 05 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) निर्धारित किया गया है। राज्य में पंजीकृत स्टार्टअप्स को ईएमडी में छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है।
भूमि लीज अवधि 30, 60 अथवा 90 वर्षों तक निर्धारित की गई है, जिसमें नवीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। निवेश के आकार के अनुसार अग्रिम भुगतान को निवेशक-अनुकूल बनाया गया है। 50 लाख तक की परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत, 50 लाख से 2.5 करोड़ तक के निवेश के लिये 35 प्रतिशत, 2.5 करोड़ से 7.5 करोड़ तक के निवेश के लिये 30 प्रतिशत तथा 7.5 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान निर्धारित किया गया है।शेष राशि अधिकतम 10 किश्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है, जिसकी अवधि परियोजना के आकार के अनुसार 1.5 वर्ष से 05 वर्ष तक होगी।किश्तों पर 09 प्रतिशत साधारण ब्याज तथा विलंब की स्थिति में 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का प्रावधान किया गया है।
नई नीति में उद्योग स्थापना के लिए स्पष्ट समय-सीमा भी तय की गई है, जिसके अनुसार माइक्रो इकाइयों को 12 माह, स्मॉल इकाइयों को 18 माह, मीडियम इकाइयों को 24 माह तथा लार्ज इकाइयों को 30 माह के भीतर उत्पादन प्रारंभ करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा गैर-कार्यशील इकाइयों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित उत्पादन क्षमता के 50 प्रतिशत से कम उत्पादन करने वाली इकाइयों को गैर-कार्यशील घोषित किया जा सकेगा औरउन पर भूमि लीज प्रीमियम का 02 प्रतिशत दंडात्मक किराया लगाया जाएगा।
नई नीति में औद्योगिक इकाइयों के हस्तांतरण, आंशिक हस्तांतरण, उत्पाद परिवर्तन, मर्जर एवं डी-मर्जर की प्रक्रियाओं को भी अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही पहली बार एक सुव्यवस्थित "सरेन्डर एवं एग्जिट मैकेनिज्म" लागू किया गया है, जिससे निष्क्रिय औद्योगिक भूमि का त्वरित पुनः उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
प्लग-एंड-प्ले शेड की अवधारणा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसे शेडों का प्रारंभिक आवंटन 05 वर्षों के लिए होगा जिसे अधिकतम 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। आवंटन के 90 दिनों के भीतर संचालन प्रारंभ करना अनिवार्य होगा।
बियाडा की यह नई नीति राज्य में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और उद्योग स्थापना को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
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