, July 11 -- नई व्यवस्था के तहत बिहार हेल्थ एप्लीकेशन विजनरी योजना फॉर ऑल (भाव्या)पोर्टल के माध्यम से ओपीडी),आईपीडी), दुर्घटना एवं आपातकालीन सेवाओं में आने वाले सभी मरीजों की उपचार प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। मरीजों का पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवा, रेफरल और उपचार संबंधी सभी विवरण भाव्या पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगे। भर्ती मरीजों की आभा पहचान संख्या बनाकर उनका (ईएचआर) तैयार किया जाएगा,जिससे भविष्य में उपचार और अधिक सुगम एवं प्रभावी होगा।निर्देशों में सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू एवं 24x7 इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावी संचालन, चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल कर्मियों के पोर्टल पर पंजीकरण, ड्यूटी रोस्टर की ऑनलाइन प्रविष्टि तथा सभी उपलब्ध चिकित्सीय सुविधाओं की अद्यतन जानकारी दर्ज करने को अनिवार्य किया गया है।इसके साथ ही मरीज को रेफर करने से पूर्व संबंधित चिकित्सक को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक चिकित्सा सुविधा संबंधित संस्थान में उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक रेफरल का स्पष्ट कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा तथामरीज की उपचार यात्रा का पूरा विवरण भाव्या पोर्टल पर अद्यतन कर उसकी कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज अथवा उसके परिजन को उपलब्ध कराई जाएगी।
रेफरल व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति का गठन किया गया है। यह समिति नियमित रूप से रेफरल मामलों की समीक्षा करेगी तथा अनावश्यक रेफरल की रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। इसके लिए राज्य स्तर पर भी एक नोडल पदाधिकारी नामित किए गए हैं, जो सभी जिलों के साथ नियमित समीक्षा कर व्यवस्था की सतत निगरानी करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से मरीजों को अपने निकटतम सरकारी अस्पतालों में बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध होगा, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा राज्य की रेफरल व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुदृढ़ बनेगी।
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