, April 9 -- वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. विजय कुमार ने कहा कि हिन्दी साहित्य में दूसरी परंपरा की खोज हुई है। यह दूसरी परंपरा बुद्ध, सिद्ध, नाथ, कबीर आदि की है। राहुल इसी परम्परा के लेखक थे। दुनिया ने बुद्ध को लाइट ऑफ एशिया माना लेकिन हम देखते हैं हिन्दी साहित्य में बुद्ध को विस्मृत कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि राहुल जी के प्रयासों से बुद्ध की आधुनिक हिन्दी साहित्य में पुनर्स्थापना होती है। उनका यह सबसे बड़ा साहित्यिक अवदान है कि वर्चस्ववादी दर्शन के बरक्स समतामूलक वैकल्पिक दर्शन को स्थापित करने में उन्होंने पूरी रचनात्मक ऊर्जा लगाई।

सह प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि बुद्ध के बाद राहुल सांकृत्यायन और नागार्जुन का महाभिनिष्क्रमण हुआ। ज्ञान और मुक्ति की तलाश में दोनों महापुरुष अपनी वैचारिक यात्रा पर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्यता की मुक्ति की तलाश में राहुल बौद्ध धर्म से मार्क्सवाद तक की यात्रा तय करते हैं। दुनियाभर की सभ्यता-संस्कृति पर उन्होंने गंभीर चिंतन मनन किया तो बस मानव-मुक्ति के उद्देश्य से। इसमें वो बहुत हद तक सफल भी हुए क्योंकि जितने लोगों को उन्होंने कम्युनिस्ट बनाया शायद ही किसी अन्य साहित्यकार को यह गौरव प्राप्त हुआ हो। शोषितों, वंचितों के प्रति पक्षधरता के कारण हमेशा मार्क्सवाद उनकी वैचारिक दृष्टि रही।

सह प्राचार्य डॉ. महेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि राहुल ने ज्ञान राशि, जनमुक्ति और साहित्य के विस्तार के लिए घुमक्कड़ी वृत्ति को चुना था। उन्होंने कहा कि राहुल ने वर्चस्व और वैचारिक-सामाजिक विकृतियों और विचलन का हर स्तर पर विरोध किया। यहाँ तक कि यथोचित बौद्ध दर्शन और कम्युनिस्ट पार्टी भी उनकी आलोचना से नहीं बची। उनके साहित्य में बौद्ध दर्शन तथा मार्क्सवादी दर्शन का संयोग दिखता है, जो आज भी नितांत प्रासंगिक है!राजकीय डिग्री कॉलेज, राजगीर के प्राचार्य डॉ.आनंद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि राहुल जी की हिन्दी साहित्येतिहास लेखन में हस्तक्षेपकारी भूमिका है। उन्होंने आदिकाल को उचित ही सिद्ध-सामंत काल चिह्नित किया था। यह मान्यता बिल्कुल तथ्यसम्मत है। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी दुर्गानंद ठाकुर ने किया।

मौके पर मारवाड़ी महाविद्यालय के सहायक प्राचार्य डॉ. अनुरुद्ध सिंह, डॉ.भास्कर तथा शोधार्थी समीर, सुभद्रा, अभिनव, मलय नीरव, संध्या, संजय महतो, अपर्णा कुमारी, शिवानी कुमारी, रोहित पटेल, बेबी कुमारी, रूबी कुमारी, कंचन, स्नेहा समेत बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित