, April 18 -- प्रो. अनिल कुमार ने अपने वक्तव्य में लाल पहाड़ी उत्खनन के निष्कर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस उत्खनन से गंगा घाटी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बौद्ध विहार "श्रीमद् धर्म विहार" के अस्तित्व के महत्वपूर्ण प्रमाण प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह खोज न केवल क्षेत्र की बौद्ध परंपरा को नई दृष्टि से समझने में सहायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि बिहार प्राचीन काल में बौद्ध शिक्षा और साधना का एक प्रमुख केंद्र रहा है। नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने विचार रखते हुए भारतीय बौद्ध परंपरा की समृद्ध विरासत और उसके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
डॉ. रजत सान्याल ने पश्चिम बंगाल के बौद्ध मठों पर अपने व्याख्यान में पूर्वी भारत की मठीय परंपरा के ऐतिहासिक विस्तार और उसके अध्ययन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में उपस्थित अन्य विद्वानों ने भी प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
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