, March 17 -- कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा 51 फसलों के उन्नत किस्म और 79 नई तकनीकों का विकास तथा किसानों तक उनका विस्तार एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे किसान की पैदावार, आमदनी और आत्मविश्वास से जुड़ा हुआ है।उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष किसानों को 11 हजार क्विंटल से अधिक उन्नत बीज उपलब्ध कराना भी एक बड़ा और प्रशंसनीय कार्य है। जब किसान के हाथ में गुणवत्तायुक्त बीज, नई तकनीक और सही सलाह होगी, तब कम लागत में अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफा संभव होगा।

श्री यादव ने कहा कि आज उद्घाटन सत्र में "डिजिटल एग्रीकल्चर" विषयक सेमिनार की शुरुआत भी इस बात का प्रमाण है कि अब खेती केवल परंपरा से नहीं, बल्कि विज्ञान, डेटा, तकनीक और जानकारी से भी आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि किसान डिजिटल रूप से सशक्त बने, मौसम की जानकारी समय पर पाए, बाजार की सूचना समझे और तकनीक का लाभ सीधे अपने खेत में पाये।

कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय 22 जिलों में जलवायु अनुकूल खेती पर काम कर रहा है और आठ हजार से अधिक पंचायतों तक मौसम आधारित कृषि सलाह पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए बहुत बड़ी मदद है। इससे किसान भाई समय पर सही निर्णय ले सकेंगे और नुकसान कम कर सकेंगे। सरकार बीज वितरण, कृषि यंत्रीकरण, फसल विविधीकरण, बागवानी, मृदा जांच, प्रशिक्षण, जलवायु अनुकूल खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अब खेती केवल अनुभव से नहीं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार से भी चलेगी।

श्री यादव ने कहा कि बिहार के कृषि उत्पाद आज देश-दुनिया में पहचान बना रहे हैं। मखाना, श्रीअन्न, जर्दालु और मालदा आम, सोनाचूर चावल जैसे उत्पाद हमारे गौरव हैं। उन्होंने कहा कि सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्में किसान की आय बढ़ाने में नई भूमिका निभाएँगी। साथ ही नीरा, पोषण वाटिका और कृषि आधारित उद्यम गांवों में रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए।

उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम खेती को परंपरा से भी जोड़ें और तकनीक से भी, किसान को ज्ञान से भी जोड़ें और बाजार से भी और गाँव के नौजवान को रोजगार खोजने वाला नहीं, कृषि उद्यमी बनने वाला बनाए।

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