, March 14 -- कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि रोडमैप के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए खोजपरक और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की मांग है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि जब सतत कृषि की चर्चा व्यापक रूप से नहीं हो रही थी, तब मुख्यमंत्री श्री कुमार ने जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के माध्यम से सतत कृषि पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में बिहार देश का पहला राज्य बना, जहां जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत सतत कृषि की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। पिछले 20 वर्षों में चार कृषि रोडमैप के जरिए बिहार के कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं।उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज एक बड़ी समस्या है। बिहार में कहीं अत्यधिक सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बाढ़ आती है।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार के दिशा-निर्देश में बाढ़ की समस्या को न्यूनतम करने की कोशिश की गई है। बारिश के पानी का उपयोग भी कुशल तरीके से किया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा के जल का इस्तेमाल गया और नवादा जैसे शहरों में पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में बिहार में तेजी से काम किया जा रहा है और विकास के हर पैमाने पर राज्य आगे बढ़ रहा है।

श्री झा ने कहा कि बिहार के विकास के लिए अगले पांच साल बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को देश के शीर्ष 10 राज्यों में स्थान बनाना है। पारंपरिक कृषि से हटकर कैश क्रॉप्स की ओर कदम बढ़ाना जरूरी है। इससे किसानों के जीवन में भी खुशहाली आएगी।

सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है और इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों को मिलकर काम करना होगा।

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