, Feb. 25 -- सम्मेलन में अन्य राज्यों से आए सफल किसानों, उद्यमियों एवं संस्थाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उपचारित एवं अर्ध-प्रसंस्कृत बांस तथा उससे निर्मित उत्पाद कच्चे बांस की तुलना में कई गुना अधिक आय प्रदान करते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए यह क्षेत्र अत्यंत उपयुक्त है, क्योंकि अधिकांश गतिविधियाँ कौशल आधारित हैं और स्थानीय स्तर पर संचालित की जा सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी हितधारकों से सरकार और समाज की साझेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया, जिससे बांस बिहार में हरित विकास, रोजगार सृजन और समावेशी समृद्धि का सशक्त आधार बन सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने की। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, आईसीएआर, राष्ट्रीय बांस मिशन, केरल वन अनुसंधान संस्थान, विभिन्न अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ, एफपीओ, सहकारी समितियाँ, स्टार्ट-अप, कारीगर समूह, स्वयं सहायता समूह, जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारी, तथा बड़ी संख्या में किसान-उद्यमी उपस्थित थे।
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