, April 9 -- श्री यादव ने कहा कि डिजिटल कृषि निदेशालय का एक अन्य उद्देश्य कृषि विभाग के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न निदेशालयों, निगमों और संभागीय कार्यालयों की ओर से संचालित योजनाओं में आवश्यक डिजिटल आधारभूत संरचना, मोबाइल एप्लीकेशन और ई-गवर्नेंस टूल्स का विकास एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली न केवल योजनाओं के कार्यान्वयन की गति बढ़ाएगी, बल्कि किसानों तक सेवाओं की पहुँच भी अधिक प्रभावी बनाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र प्रायोजित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाईजेशन योजना अंतर्गत 12 जिलों के बीज गुणन प्रक्षेत्र में मॉडल कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि मॉडल कस्टम हायरिंग सेन्टर में संबंधित जिलों के अनुसार 25 प्रकार के उपयोगी कृषि यंत्रों उपलब्ध कराया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बीज गुणन प्रक्षेत्र के आस-पास के गाँवों के किसानों को यंत्रों की उपयोगिता पर प्रत्यक्षण एवं प्रशिक्षण कराना है। साथ ही, प्रक्षेत्रों में स्थापित मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर का संचालन पीपीपी मोड में किया जायेगा। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से न केवल प्रक्षेत्रों में गुणवतायुक्त बीज उत्पादन होगा बल्कि आस-पास के गाँवों में फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होगी।
श्री यादव ने बताया कि 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशाला की स्थापना वित्तीय वर्ष 2025-26 में की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग में कमी लाना, मिट्टी को स्वस्थ रखना तथा कृषकों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि लाना है।
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार के किसानों के हित में कृषि विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का समावेश, उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने एवं उपयोगी कृषि यंत्रों का किसानों के समक्ष प्रत्यक्षण से बिहार राज्य में फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायता होगी। साथ ही, किसानों के आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग की यह पहल किसानों के हित में कारगर सिद्ध होगी।
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