, Feb. 18 -- कृषि मंत्री ने घोषणा की कि विधानमंडल सत्र समाप्त होने के बाद विभाग प्रत्येक जिले में जाकर किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों एवं नवाचारी युवाओं के साथ संवाद करेगा, जिससे कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने राज्य के कृषि रोड मैप की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुनियोजित रणनीति और समन्वित प्रयासों से बिहार कृषि विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 'कृषि कर्मण पुरस्कार' के माध्यम से राज्य को प्राप्त राष्ट्रीय पहचान, फसल उत्पादन एवं उत्पादकता में हुई उल्लेखनीय वृद्धि तथा डिजिटल कृषि पहलों के विस्तार की जानकारी दी। साथ ही आधुनिक कृषि मशीनरी को बढ़ावा देने, किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और लागत में कमी लाकर आय वृद्धि सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
श्री लाल ने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आय में सतत वृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कृषि केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है।उन्होंने किसानों से अपील की कि वे परंपरागत फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली, कम अवधि में बेहतर प्रतिफल देने वाली एवं बाजार की मांग के अनुरूप फसलों की खेती की ओर भी अग्रसर हों।मूल्य-आधारित एवं बाजार उन्मुख खेती को अपनाकर, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक पद्धतियों के समावेश से किसान अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने राज्य में कृषि क्षेत्र की प्रगति एवं विभागीय पहलों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में धान, गेहूं एवं मक्का के उत्पादन तथा उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के लिए विशेष रणनीति के तहत कार्य किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करते हुए राज्य के विभिन्न जिलों की भौगोलिक एवं जलवायु विशेषताओं के अनुरूप फसल चयन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
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