, July 7 -- एकरूप पीएचडी विनियम, 2026 के अंतर्गत पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित बनाया गया है। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश यूजीसी-नेट या यूजीसी-सीएसआईआर नेट अथवा गेट के आधार पर होगा, जिसमें 80 प्रतिशत वेटेज प्रवेश परीक्षा के अंकों तथा 20 प्रतिशत वेटेज साक्षात्कार को दिया जाएगा। चार-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के पात्र विद्यार्थियों को भी पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा। इस नई व्यवस्था में पूर्णकालिक एवं अंशकालिक, दोनों प्रकार के पीएचडी कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। शोध पद्धति, शोध एवं प्रकाशन नैतिकता तथा शिक्षण अथवा शिक्षाशास्त्र संबंधी पाठ्यक्रम अनिवार्य किए गए हैं।
नये सुधारों के बाद शोध-निर्देशकों के पारदर्शी आवंटन, साहित्यिक चोरी पर कड़े प्रावधान, शोध प्रगति की नियमित समीक्षा तथा यथासंभव छह माह के भीतर शोधप्रबंध मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है। महिला शोधार्थियों एवं दिव्यांगजन के लिए विशेष रियायतें भी प्रदान की गई हैं।
इस नई शैक्षिक व्यवस्था में विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, रचनात्मक सोच तथा संज्ञानात्मक कौशल के विकास के उद्देश्य से ''क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड्स'' को सभी विषयों के स्नातक विद्यार्थियों के लिए चौथे सेमेस्टर तक दो-क्रेडिट क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई है। यह अभिनव पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता, सृजनात्मकता, शब्द-भंडार, संप्रेषण कौशल एवं समस्या-समाधान क्षमता का विकास करेगा।
इन व्यापक सुधारों से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक लचीली, बहुविषयक, शोधोन्मुख, कौशल- आधारित तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी। साथ ही, विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार एवं रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने में सहायता मिलेगी।
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